क़ुरआन-ए-करीम अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की वह मुक़द्दस किताब है, जो पूरी इंसानियत के लिए हिदायत, रहनुमाई और कामयाबी का सरचश्मा है। यह किताब इंसान को नेकी और भलाई का रास्ता दिखाती है और ज़िंदगी गुज़ारने का बेहतरीन तरीक़ा सिखाती है। क़ुरआन-ए-करीम की तिलावत बाइस-ए-सवाब, इसकी तालीम हासिल करना अज़ीम सआदत और इसकी तालीमात पर अमल करना दुनिया व आख़िरत की कामयाबी का ज़रिया है।

ख़ुशक़िस्मत हैं वे वालिदैन जिनकी औलाद क़ुरआन-ए-करीम की तालीम हासिल करती है और वे बच्चे जो अपने सीनों को कलाम-ए-इलाही के नूर से मुनव्वर करते हैं।
नोएडा: 1 नवंबर 2026, रविवार को मदरसा अहले सुन्नत रज़ाए मुस्तफ़ा, गली नंबर 14, 25 फुटा रोड, बुध विहार, सेक्टर 63, नोएडा में जश्न-ए-तकमीले क़ुरआन-ए-करीम की एक पुरनूर और रूहपरवर तक़रीब मुनअक़िद हुई, जिसमें दो ख़ुशनसीब तलबा, हाफ़िज़ मुहम्मद उमर और हाफ़िज़ आस मुहम्मद ने क़ुरआन-ए-करीम हिफज़ करने की सआदत हासिल की।

मदरसे के बानी हज़रत क़ारी फ़ुरक़ान रज़वी साहब और उस्ताद हज़रत मुफ़्ती अहमद रज़ा क़ादरी मंज़री साहब की निगरानी में मुनअक़िद इस तक़रीब में दोनों हाफ़िज़ों के वालिदैन, अहले-ख़ाना, रिश्तेदारों और इलाक़े के मुअज़्ज़ज़ अफ़राद ने शिरकत करके अपनी ख़ुशी का इज़हार किया और बच्चों की हौसला-अफ़ज़ाई की।

इस मौक़े पर मुतअद्दिद उलमा-ए-किराम ने ख़ुसूसी शिरकत की, जिनमें हज़रत क़ारी सद्दाम साहब, हज़रत मुफ़्ती मुनजिद साहब, हज़रत मुफ़्ती अहमद रज़ा अमजदी साहब और हज़रत क़ारी नसीम साहब के अस्मा-ए-गिरामी क़ाबिल-ए-ज़िक्र हैं। उलमा-ए-किराम ने क़ुरआन-ए-करीम की अज़मत, इसकी तालीम व तअल्लुम की अहमियत और हाफ़िज़ों के मक़ाम व मर्तबे पर रोशनी डाली।
तक़रीब में कमेटी के अराकीन शराफ़त हुसैन, डॉक्टर अशकार, हामि




